हिंदी की मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती का शुक्रवार को यहां 93 साल की उम्र में निधन हाे गया। उनका जन्म 18 फरवरी 1925 को गुजरात-पंजाब प्रांत में हुआ था। यह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है। बंटवारे के वक्त उनका परिवार दिल्ली आकर बस गया था। उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली और शिमला में हुई।
2017 में मिला ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’
सोबती को 1980 में ‘जिंदगीनामा' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। 1996 में उन्हें साहित्य अकादमी का फैलो बनाया गया जो अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है। 2017 में इन्हें भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान "ज्ञानपीठ पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।
सोबती को 1981 में शिरोमणि पुरस्कार और 1982 में हिंदी अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान पद्मभूषण लेने से इनकार कर दिया था। 2015 में असहिष्णुता के मुद्दे पर साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया था।
सोबती ने लेखन की शुरुआत कविताओं से की थी, लेकिन बाद में उनका रुख फिक्शन की ओर हो गया। बादलों के घेरे उनका कहानी संग्रह है। डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, यारों के यार, तिन पहाड़, सूरजमुखी अंधेरे के, सोबती एक सोहबत, जिंदगीनामा, ऐ लड़की, समय सरगम, जैनी मेहरबान सिंह उनके उपन्यास हैं।
आपसी व्यापार सहयोग से सभी को फायदा होगा: ट्रम्प
ट्रम्प ने भारत में अमेरिकी शराब पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि भारत शराब पर 150% आयात शुल्क वसूलता है जबकि हमें भारतीय शराब के इंपोर्ट पर कुछ नहीं मिलता।
ट्रम्प गुरुवार को अमेरिका और अन्य देशों के व्यापारिक नियमों पर कानूनविदों से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने हरे रंग का बोर्ड भी दिखाया जो दूसरे देशों के व्यापार शुल्कों को दर्शाता है। ट्रम्प ने कहा कि आपसी व्यापार सहयोग से अमेरिकी कामगारों को फायदा होगा। इससे उन्हें बराबर मौके मिलेंगे।
दूसरे देश समझते हैं अमेरिका स्मार्ट नहीं: ट्रम्प
ट्रम्प ने दोहराया कि दूसरे देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं। वो कई तरह के टैरिफ और टैक्स लगाते हैं। उनके बाजारों में कई तरह की पाबंदिया भी हैं। इसलिए, हम अपने प्रोडक्ट वहां नहीं बेच पाते। उन्हें लगता है कि अमेरिका बहुत अच्छा है या फिर स्मार्ट नहीं है। कई सालों से ऐसा हो रहा है, हम इसे बंद करना चाहते हैं। लेकिन, कई बार हमारे सहयोगी ही ज्यादा फायदा उठाते हैं। ट्रम्प का कहना है कि दूसरे देश या तो टैरिफ लगाना बंद कर दें नहीं तो हम उनसे कई गुना ज्यादा शुल्क लगाएंगे।
24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल ने एजेएल को अलॉट कराया था। कंपनी ने 10 साल तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया तो 30 अक्टूबर 1992 को हुड्डा ने अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट पर वापस कब्जा ले लिया।
Friday, January 25, 2019
Thursday, January 17, 2019
पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी का यह सबसे सही समय: एबी डी विलियर्स
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डी विलियर्स ने पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी के लिए यह सबसे सही समय है। इसके लिए मेरे पास पाकिस्तान को मदद करने का एक मौका है।" डी विलियर्स को लगता है कि पाकिस्तान सुपर लीग (पीसीएल) में उनके खेलने से दुनिया के बड़े खिलाड़ी पाक में आने के लिए प्रेरित होंगे।
2009 में श्रीलंकाई टीम के बस पर लाहौर में आतंकी हमले हुए थे
पाकिस्तान में साल 2009 में श्रीलंकाई टीम के बस पर हुए आतंकी हमले के बाद वहां अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं के बराबर खेले गए। इन 10 सालों में सिर्फ वेस्टइंडीज की टीम ही वहां खेलने गई। पिछले साल दोनों टीमों के बीच तीन टी-20 खेले गए थे। पाकिस्तान अपने हिस्से के मैच की मेजबानी यूएई में करता है।
इस साल नौ मार्च और 10 मार्च को लाहौर में पीसीएल में खेले जाएंगे। इन दोनों मैच में डी विलियर्स खेल सकते हैं। उन्होंने कहा, "मैं कुछ साल पहले पाक जाने के लिए तैयार नहीं था। सभी वहां की परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे, लेकिन अब मुझे लगता है कि वहां क्रिकेट की वापसी का यह सही समय है।"
डी विलियर्स ने कहा, "मैं वहां जाने और बेहतर क्रिकेट की उम्मीद कर रहा हूं। मैं पूरी दुनिया को दिखाऊंगा कि पाकिस्तान फिर से क्रिकेट की मेजबानी के लिए सुरक्षित है।" डी विलियर्स ने दक्षिण अफ्रीका के लिए कुल 420 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। इसमें उन्होंने 47 शतकों की मदद से 20,014 रन बनाए।
ने इटालियन सुपर कप टूर्नामेंट जीत लिया। बुधवार को सऊदी अरब में खेले गए फाइनल में उसने एसी मिलान को 1-0 से हराया। टीम के लिए स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 61वें मिनट में हेडर से गोल किया। युवेंटस का सीजन में यह पहला खिताब है। वह रिकॉर्ड आठवीं बार इटालिन सुपर कप चैम्पियन बना। उसने एसी मिलान (7) को पीछे छोड़ दिया।
युवेंटस ने पिछले साल रोनाल्डो को अपने साथ जोड़ा था। टीम का लक्ष्य 1996 के बाद पहली बार चैम्पियंस लीग खिताब जीतना है। रोनाल्डो ने मैच के बाद कहा, "मैं युवेंटस के साथ पहला खिताब जीतने पर खुश हूं। यह सिर्फ शुरुआत है। हमने यह खिताब जीत लिया। अब अगले खिताब पर नजर है।
रोनाल्डो ने करियर का 28वां खिताब जीता
पुर्तगाल के रोनाल्डो ने करियर में पांच चैम्पियंस लीग खिताब जीते हैं। उन्होंने इंग्लैंड, स्पेन, इटली और पुर्तगाल में खेलते हुए कुल 28 खिताब जीते हैं। रोनाल्डो ने इस सीजन में युवेंटस के लिए अभी तक 16 किए हैं।
2009 में श्रीलंकाई टीम के बस पर लाहौर में आतंकी हमले हुए थे
पाकिस्तान में साल 2009 में श्रीलंकाई टीम के बस पर हुए आतंकी हमले के बाद वहां अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं के बराबर खेले गए। इन 10 सालों में सिर्फ वेस्टइंडीज की टीम ही वहां खेलने गई। पिछले साल दोनों टीमों के बीच तीन टी-20 खेले गए थे। पाकिस्तान अपने हिस्से के मैच की मेजबानी यूएई में करता है।
इस साल नौ मार्च और 10 मार्च को लाहौर में पीसीएल में खेले जाएंगे। इन दोनों मैच में डी विलियर्स खेल सकते हैं। उन्होंने कहा, "मैं कुछ साल पहले पाक जाने के लिए तैयार नहीं था। सभी वहां की परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे, लेकिन अब मुझे लगता है कि वहां क्रिकेट की वापसी का यह सही समय है।"
डी विलियर्स ने कहा, "मैं वहां जाने और बेहतर क्रिकेट की उम्मीद कर रहा हूं। मैं पूरी दुनिया को दिखाऊंगा कि पाकिस्तान फिर से क्रिकेट की मेजबानी के लिए सुरक्षित है।" डी विलियर्स ने दक्षिण अफ्रीका के लिए कुल 420 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। इसमें उन्होंने 47 शतकों की मदद से 20,014 रन बनाए।
ने इटालियन सुपर कप टूर्नामेंट जीत लिया। बुधवार को सऊदी अरब में खेले गए फाइनल में उसने एसी मिलान को 1-0 से हराया। टीम के लिए स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 61वें मिनट में हेडर से गोल किया। युवेंटस का सीजन में यह पहला खिताब है। वह रिकॉर्ड आठवीं बार इटालिन सुपर कप चैम्पियन बना। उसने एसी मिलान (7) को पीछे छोड़ दिया।
युवेंटस ने पिछले साल रोनाल्डो को अपने साथ जोड़ा था। टीम का लक्ष्य 1996 के बाद पहली बार चैम्पियंस लीग खिताब जीतना है। रोनाल्डो ने मैच के बाद कहा, "मैं युवेंटस के साथ पहला खिताब जीतने पर खुश हूं। यह सिर्फ शुरुआत है। हमने यह खिताब जीत लिया। अब अगले खिताब पर नजर है।
रोनाल्डो ने करियर का 28वां खिताब जीता
पुर्तगाल के रोनाल्डो ने करियर में पांच चैम्पियंस लीग खिताब जीते हैं। उन्होंने इंग्लैंड, स्पेन, इटली और पुर्तगाल में खेलते हुए कुल 28 खिताब जीते हैं। रोनाल्डो ने इस सीजन में युवेंटस के लिए अभी तक 16 किए हैं।
Wednesday, January 9, 2019
JNU अटेंडेंस मामला: ऑल-इन-वन स्मार्ट कार्ड से दर्ज होगी उपस्थिति
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) शिक्षक और स्टूडेंट्स की उपस्थिति के लिए स्मार्ट कार्ड की शुरुआत करने जा रही है, जिसके बाद स्टूडेंट और स्टाफ कार्ड के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे. बता दें कि यह फैसला इस वक्त आया है, जब शिक्षक संघ अनिवार्य उपस्थिति के फैसले को लेकर प्रशासन का विरोध कर रहे हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, चिंतामणि महापात्रा ने कहा कि सभी संस्थानों में बायोमेट्रिक मशीन लगा दी गई है और यह जल्द ही काम करना शुरू कर देगी और एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग में भी सिस्टम लगा दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि कार्ड-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस पॉलिसी छात्रों, कर्मचारियों और टीचर्स की उपस्थिति के लिए है.
JNU प्रशासन के प्लान में अभी भी सैटेलाइट कैंपस! सरकार कर चुकी है मना
यह एक कार्ड आईडी कार्ड, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, पुस्तकालय कार्ड और स्वास्थ्य केंद्र कार्ड के रूप में काम करेगा. साथ ही इस कार्ड में उपस्थिति का रिकॉर्ड होगा, जिसकी जानकारी सिर्फ एक टेक्निल पर्सन के पास होगी. वहीं महापात्रा ने यह भी कहा कि
अनिवार्य अटेंडेंस पॉलिसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार है, जिसमें बताया गया है कि एक टीचर को हर रोज कम से कम पांच घंटे के लिए परिसर में उपलब्ध रहना पड़ेगा.
जानें- किस यूनिवर्सिटी में कब से शुरू होंगे एडमिशन, देखें पूरा कैलेंडर
बता दें कि शिक्षक संघ, प्रशासन की ओर से लागू की गई अटेंडेंस प्रक्रिया के खिलाफ हैं. साथ ही उन्होंने एक सर्वे के आधार पर बताया था कि दुनियाभर के 21 देशों की 75 यूनिवर्सिटीज में से जेएनयू (JNU) की अटेंडेंस पॉलिसी सबसे खराब है. हालांकि इस सर्वे के खिलाफ भी कई लोग विरोध कर रहे हैं.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि बीसीसीआई ने बुमरा को वनडे और टी-20 सीरीज में आराम देने का फैसला लिया है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में बुमरा की जगह मो.सिराज लेंगे और न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में सिद्धार्थ कौल उनकी जगह लेंगे.
बता दें कि टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने टेस्ट सीरीज जीत में बुमरा के योगदान पर बोलते हुए कहा था कि अगर आपके तेज गेंदबाज खुश हैं और एक टीम के तौर पर लड़ाई कर रहे हैं, तो आप दुनिया में कहीं भी जीत सकते हैं और आपके पास विश्व में कहीं भी जीतने का मौका होता है. कोहली ने कहा कि पिछले 12 महीने में मैं उनके योगदान को उसी तरह से देखूंगा जैसे पूरे सीजन में बल्लेबाजों ने प्रदर्शन किया.
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक जीत को बड़ी उपलब्धि बताया है. उन्होंने इसका श्रेय टीम की बल्लेबाजी को दिया. बता दें कि टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में खेली गई चार टेस्ट मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम की. यह आंकड़ा 3-1 भी हो सकता था, लेकिन चौथे मैच के पांचवें और आखिरी दिन का खेल बारिश के भेंट चढ़ गया और मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ.
रिपोर्ट्स के अनुसार, चिंतामणि महापात्रा ने कहा कि सभी संस्थानों में बायोमेट्रिक मशीन लगा दी गई है और यह जल्द ही काम करना शुरू कर देगी और एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग में भी सिस्टम लगा दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि कार्ड-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस पॉलिसी छात्रों, कर्मचारियों और टीचर्स की उपस्थिति के लिए है.
JNU प्रशासन के प्लान में अभी भी सैटेलाइट कैंपस! सरकार कर चुकी है मना
यह एक कार्ड आईडी कार्ड, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, पुस्तकालय कार्ड और स्वास्थ्य केंद्र कार्ड के रूप में काम करेगा. साथ ही इस कार्ड में उपस्थिति का रिकॉर्ड होगा, जिसकी जानकारी सिर्फ एक टेक्निल पर्सन के पास होगी. वहीं महापात्रा ने यह भी कहा कि
अनिवार्य अटेंडेंस पॉलिसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार है, जिसमें बताया गया है कि एक टीचर को हर रोज कम से कम पांच घंटे के लिए परिसर में उपलब्ध रहना पड़ेगा.
जानें- किस यूनिवर्सिटी में कब से शुरू होंगे एडमिशन, देखें पूरा कैलेंडर
बता दें कि शिक्षक संघ, प्रशासन की ओर से लागू की गई अटेंडेंस प्रक्रिया के खिलाफ हैं. साथ ही उन्होंने एक सर्वे के आधार पर बताया था कि दुनियाभर के 21 देशों की 75 यूनिवर्सिटीज में से जेएनयू (JNU) की अटेंडेंस पॉलिसी सबसे खराब है. हालांकि इस सर्वे के खिलाफ भी कई लोग विरोध कर रहे हैं.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि बीसीसीआई ने बुमरा को वनडे और टी-20 सीरीज में आराम देने का फैसला लिया है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में बुमरा की जगह मो.सिराज लेंगे और न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में सिद्धार्थ कौल उनकी जगह लेंगे.
बता दें कि टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने टेस्ट सीरीज जीत में बुमरा के योगदान पर बोलते हुए कहा था कि अगर आपके तेज गेंदबाज खुश हैं और एक टीम के तौर पर लड़ाई कर रहे हैं, तो आप दुनिया में कहीं भी जीत सकते हैं और आपके पास विश्व में कहीं भी जीतने का मौका होता है. कोहली ने कहा कि पिछले 12 महीने में मैं उनके योगदान को उसी तरह से देखूंगा जैसे पूरे सीजन में बल्लेबाजों ने प्रदर्शन किया.
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक जीत को बड़ी उपलब्धि बताया है. उन्होंने इसका श्रेय टीम की बल्लेबाजी को दिया. बता दें कि टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में खेली गई चार टेस्ट मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम की. यह आंकड़ा 3-1 भी हो सकता था, लेकिन चौथे मैच के पांचवें और आखिरी दिन का खेल बारिश के भेंट चढ़ गया और मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ.
Tuesday, January 1, 2019
गाजीपुर हिंसा से सुर्खियों में आई निषाद पार्टी के बारे में ये नहीं जानते होंगे
उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली जीत के बाद पहली बार सुर्खियों में आई निषाद पार्टी गाजीपुर की घटना के बाद एक बार चर्चा के केंद्र में है. शनिवार को निषाद पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं की उग्र भीड़ की पिटाई से सिपाही सुरेंद्र वत्स की मौत हो गई थी. इस मामले में निषाद पार्टी के महासचिव अर्जुन कश्यप को मुख्य आरोपी बनाया गया है. जबकि इस संबंध में अभी तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
दरअसल, निषाद पार्टी के लोग काफी दिनों से अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण की मांग कर रहे हैं. शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली आयोजित थी, इसी दिन निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के नेतृत्व में आरक्षण की मांग को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने रोड जाम कर दिया. पीएम की सभा के लिए पुलिस ने निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को सड़क से हटाना चाहा तो उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पुलिस पर ही पथराव शुरू कर दिया. इसमें हेड कान्स्टेबल सुरेंद्र वत्स की मौत हो गई.
सूबे में निषाद पार्टी की बुनियाद संजय निषाद ने साल 2013 में रखी थी. निषाद पार्टी का पूरा नाम, 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल' है. दरअसल, किसी जाति से कोई राजनीतिक दल पंजीकृत नहीं हो सकता है. यही वजह है कि पार्टी का नाम 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल' रखा गया जिसका शॉर्ट में नाम 'NISHAD' यानी 'निषाद' होता है.
'निषाद' पार्टी का नाम रखने के पीछे संजय निषाद का सोचा समझा राजनीतिक उद्देश्य था. देश के 14 राज्यों में निषाद वंशीय अनुसूचित जाति में शामिल भी हैं. उत्तर प्रदेश में निषाद वंश से जुड़ी 7 जातियां- मंझवार, गौड़, तुरहा, खरोट, खरवार, बेलदार, कोली अनुसूचित जाति में शामिल हैं, लेकिन अन्य उपजातियों को ओबीसी में रखा गया है. इनमें केवट, मल्लाह, बिंद, मांझी, कश्यप और निषाद उपजातियां शामिल हैं.
संजय निषाद इन्हीं जातियों को संगठित कर अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हैं. वे सबसे पहले सुर्खियों में तब आए जब 7 जून, 2015 को गोरखपुर से सटे सहजनवा क्षेत्र के कसरावल गांव के पास निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया था.
संजय निषाद के साथ सैकड़ों की संख्या में निषाद समाज के लोग थे, जिनमें बड़ी संख्या युवा शामिल थे. पुलिस ने जब उन्हें हटाने की कोशिश की तो हिंसक झड़प हुई. पुलिस फायरिंग में अखिलेश निषाद नाम का युवक मारा गया. भीड़ ने कई वाहनों में तोड़-फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया. इसके बाद संजय निषाद गायब हो गए. हालांकि बाद में उन्होंने सरेंडर किया और जमानत पर रिहा हुए.
इसके बाद निषाद पार्टी ने अपनी ताकत का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन गोरखपुर में जुलाई, 2016 में किया. इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में कई उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से विजय मिश्रा ने भदोही की ज्ञानपुर सीट से जीत हासिल की.
हालांकि, निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद राजनीति में दो दशक से सक्रिय रहे हैं. लेकिन कभी भी चुनाव नहीं जीत सके हैं. गोरखपुर लोकसभा के उपचुनाव में उनके बेटे प्रवीण निषाद को सपा ने उम्मीदवार बनाया और वे जीत हासिल करने में कामयाब रहे.
संजय निषाद ने अपना सियासी सफर बामसेफ से शुरू किया. इसके बाद कैम्पियरगंज विधानसभा से एक बार चुनाव भी लड़ चुके हैं. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. इसी के बाद से अपनी जाति की राजनीति से जुट गए. साल 2008 में उन्होंने ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी वेलफेयर मिशन और शक्ति मुक्ति महासंग्राम नाम के दो संगठन बनाए. उन्होंने निषाद पार्टी से पहले राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद बनाई और बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष निषादों की विभिन्न उपजातियों को एक करने का प्रयास किया.
उन्होंने 'मछुआ समुदाय की 553 जातियों को एक मंच' पर लाने की मुहिम शुरू की. उन्होंने निषादों को बताया कि निषाद वंशीय समुदाय से जुड़ी सभी जातियों को एक मानते हुए अनुसूचित जाति में शामिल करने पर समाज का फायदा होगा. इसी के बाद 2013 में उन्होंने निषाद पार्टी बनाई.
दरअसल, निषाद पार्टी के लोग काफी दिनों से अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण की मांग कर रहे हैं. शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली आयोजित थी, इसी दिन निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के नेतृत्व में आरक्षण की मांग को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने रोड जाम कर दिया. पीएम की सभा के लिए पुलिस ने निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को सड़क से हटाना चाहा तो उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पुलिस पर ही पथराव शुरू कर दिया. इसमें हेड कान्स्टेबल सुरेंद्र वत्स की मौत हो गई.
सूबे में निषाद पार्टी की बुनियाद संजय निषाद ने साल 2013 में रखी थी. निषाद पार्टी का पूरा नाम, 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल' है. दरअसल, किसी जाति से कोई राजनीतिक दल पंजीकृत नहीं हो सकता है. यही वजह है कि पार्टी का नाम 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल' रखा गया जिसका शॉर्ट में नाम 'NISHAD' यानी 'निषाद' होता है.
'निषाद' पार्टी का नाम रखने के पीछे संजय निषाद का सोचा समझा राजनीतिक उद्देश्य था. देश के 14 राज्यों में निषाद वंशीय अनुसूचित जाति में शामिल भी हैं. उत्तर प्रदेश में निषाद वंश से जुड़ी 7 जातियां- मंझवार, गौड़, तुरहा, खरोट, खरवार, बेलदार, कोली अनुसूचित जाति में शामिल हैं, लेकिन अन्य उपजातियों को ओबीसी में रखा गया है. इनमें केवट, मल्लाह, बिंद, मांझी, कश्यप और निषाद उपजातियां शामिल हैं.
संजय निषाद इन्हीं जातियों को संगठित कर अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हैं. वे सबसे पहले सुर्खियों में तब आए जब 7 जून, 2015 को गोरखपुर से सटे सहजनवा क्षेत्र के कसरावल गांव के पास निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया था.
संजय निषाद के साथ सैकड़ों की संख्या में निषाद समाज के लोग थे, जिनमें बड़ी संख्या युवा शामिल थे. पुलिस ने जब उन्हें हटाने की कोशिश की तो हिंसक झड़प हुई. पुलिस फायरिंग में अखिलेश निषाद नाम का युवक मारा गया. भीड़ ने कई वाहनों में तोड़-फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया. इसके बाद संजय निषाद गायब हो गए. हालांकि बाद में उन्होंने सरेंडर किया और जमानत पर रिहा हुए.
इसके बाद निषाद पार्टी ने अपनी ताकत का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन गोरखपुर में जुलाई, 2016 में किया. इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में कई उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से विजय मिश्रा ने भदोही की ज्ञानपुर सीट से जीत हासिल की.
हालांकि, निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद राजनीति में दो दशक से सक्रिय रहे हैं. लेकिन कभी भी चुनाव नहीं जीत सके हैं. गोरखपुर लोकसभा के उपचुनाव में उनके बेटे प्रवीण निषाद को सपा ने उम्मीदवार बनाया और वे जीत हासिल करने में कामयाब रहे.
संजय निषाद ने अपना सियासी सफर बामसेफ से शुरू किया. इसके बाद कैम्पियरगंज विधानसभा से एक बार चुनाव भी लड़ चुके हैं. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. इसी के बाद से अपनी जाति की राजनीति से जुट गए. साल 2008 में उन्होंने ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी वेलफेयर मिशन और शक्ति मुक्ति महासंग्राम नाम के दो संगठन बनाए. उन्होंने निषाद पार्टी से पहले राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद बनाई और बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष निषादों की विभिन्न उपजातियों को एक करने का प्रयास किया.
उन्होंने 'मछुआ समुदाय की 553 जातियों को एक मंच' पर लाने की मुहिम शुरू की. उन्होंने निषादों को बताया कि निषाद वंशीय समुदाय से जुड़ी सभी जातियों को एक मानते हुए अनुसूचित जाति में शामिल करने पर समाज का फायदा होगा. इसी के बाद 2013 में उन्होंने निषाद पार्टी बनाई.
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